गर्मियाें काे बिताने का शाही परिवारों का अपना ही शाही अंदाज होता था, इसका साक्ष्य है भोपाल का बेनजीर पैलेस। यह महल गर्मियों में चलने वाली पूर्वी हवाओं की दिशा को देखते हुए शहर के तीन सीढ़ी नुमा तालाब के सबसे ऊपरी सिरे पर बनाया गया, ताकि कितनी भी गर्म हवा हो, वह महल में ठंडी होकर ही प्रवेश करे। इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के मामले में बेहद मॉर्डन इस महल की कहानी सुना रही हैं राज्य पुरातत्व संग्रहालय की क्यूरेटर नम्रता यादव। शाहजहां बेगम ने बेनजीर पैलेस 1875 में बनाया था। यह अंग्रेजी के अक्षर H के आकार का महल था, जो विशेष रूप से गर्मियों के लिए था। गर्मियों में बेगम का दरबार इसी महल में सजा करता था।
भोपाल में बेगम ने तीन सीढ़ी नुमा तालाब बनवाए, सबसे ऊपर मोतिया तालाब बनवाया। इसके निचले हिस्से पर था नूर महल तालाब और सबसे नीचे था मुंशी हुसैन बक्श तालाब। इन तालाबों के ऊपर से गुजरती हुई पूर्वी हवाएं जब तक महल के द्वार तक पहुंचती थीं, तो वे ठंडी हो चुकी होती थीं और इनसे पूरे महल में ठंडक रहती थी।
- इंडियन, यूरोपियन और पर्शियन आर्किटेक्चर को मिलाकर बनाए गए इस महल मं ऐसे वॉटर चैनल और फव्वारे थे, जो बिना किसी मशीन के पूरे महल में सर्कुलेट होते थे।
- बेनजीर पैलेस, बेगम के समय में शाही मेहमानों को ठहराने के लिए इस्तेमाल होता था। बेनजीर पैलेस के दो द्वार मोतिया तालाब की ओर खुलते थे और बीच का कोर्टयार्ड खूबसूरत फव्वारों से सजा था। उस वक्त ठेले वाली सड़क से इस महल को देखने पर फव्वारों का पानी सीधे मोतिया तालाब में गिर रहा हो।
- पैलेस के मुख्य कोर्टयार्ड के दोनों तरफ कमरों के दरवाजों में बेल्जियम से मंगवाए गए रंगीन कांच लगाया गया और कोर्टयार्ड में इंग्लैंड से मंगवाए गए कास्ट आयरन के पिलर्स का इस्तेमाल किया गया। तीन तरफ से रंगीन कांच की रोशनी के बीच मुख्य हॉल में बैठना एक अनोखा अनुभव होता था।
- 1909 में बेनजीर पैलेस में गवर्नर जनरल लॉर्ड और लेडी मिंटो मेहमान के तौर पर ठहरे थे। बाद में 1929 में महात्मा गांधी इस महल में ठहरे थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के लिए यहां एक विशाल सभा भी की थी।
- कहा जाता है कि महल के बिलकुल सामने बने मोतिया तालाब में उस समय जो मछलियां छोड़ी जाती थीं, उनको सोने की नथ पहनाई जाती थी। बेगम को इन नथ वाली मछलियां को शाम के वक्त देखना बहुत पसंद था।